गुरुवार, 26 मार्च 2015

कविता-९३ : "बचपन..."


थोडा हैरान
परेशान
और कुछ कुछ अंजान भी...

न कोई थकान
न कोई लगाम
और कुछ कुछ शैतान भी...

न कल का भान
तनिक न अभिमान
और कुछ कुछ भगवान भी..

खिलखिलाता
मुस्कराता
और हंसाता...

चपल मन.....
बचपन...!!!

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_________आपका अपना ‘अखिल जैन’_________

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