सोमवार, 20 जुलाई 2015

कविता-२०८ : "जीवन दायिनी नर्स ‘अरुणा’ को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए..."

आओ...
एक खेल खेले जिसका नाम है
मजाक...

वर्षो से खेला जा रहा इस
संबिधान युक्त भारत में
नियम कानून समाज
इस खेल के भाग
पर जीत न पाया कोई इस खेल में

नारी अस्मिता
बाल अपराध
यौन शोषण
और भी बहुत कुछ .....

जानते हो एक विशेषता इस खेल की

खेल शुरू करने वाले को
सात साल
और जिस पर खेल रचा उसे
42 साल का दण्ड

उफ्फ्फ्फ़

कैसा अजीब ये खेल
सच मजाक ही है
पर...
कब तक ???
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_________आपका अपना ‘अखिल जैन’_________

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