बुधवार, 13 मई 2015

कविता-१४१ : "कैसे गुजरेगी ज़िन्दगी..."


तुम जो नहीं तो कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं तो
मै हूँ पर न होने जैसा ही
सच !

शून्य का धरातल ही है
भले ही मायने हो
जिन्दगी के , क्योकि
साँसों का संग्राम ही तो
जिन्दगी है लोगो की नजर में
पर इस नीरस जिन्दगी में
क्या है शेष ??

कुछ भी तो नहीं न
और जब तुम नहीं तो
कैसे गुजरेगी ये जिन्दगी
नहीं जानता मै ???
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_________आपका अपना ‘अखिल जैन’_________

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