सोमवार, 15 जून 2015

कविता-१७४ : "तेरा साथ... 13-7 "

ये तारीखे भी आती है

चली जाती है.....

पर कुछ तारीख जेहन में 
उतर जाती है..
ठीक वैसे ही जैसे तुम्हारे 
नर्म हांथो पर रंग मेहँदी का...

अब आज की तारीख ही देख लो
13-7 तेरा सात...
कैलेंडर में दिखता है चेहरा तेरा ही..

और साथ तो है ही वर्ना
क्यों दिखता तेरा चेहरा 
कागज के कैलेंडर में / तारीख में
लेकिन बदलेगी ये तारीख कल
एक समय के बाद...

पर नहीं बदलेगा हमारा प्यार
आज की तारीख की तरह...
जीवन भर ही रहेगा
तेरा साथ 13-7...!!!
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_________आपका अपना ‘अखिल जैन’_________

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