मंगलवार, 9 जून 2015

कविता-१६८ : "कैसे कह दूँ...???"


बताना होगा तुमको ही आज

कर लो कुछ भी
पर...



ये रोज के रोज की घंटो बाते
रूठना झगड़ना
और भी कुछ अनकहा सा...


चिंता रहती है तुम्हे
मेरी खुद से भी ज्यादा...


और पूछो तो वही रटा पिटा
सा जवाब
कि नहीं है प्यार तुमसे...


मत कहो 
बिलकुल न कहो
पर,

ये बता दो कि
कैसे कह दू 
मैं कि मुझे तुमसे है
प्यार बहुत
सच...!!!
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_________आपका अपना ‘अखिल जैन’_________

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